संदेश

आत्मा लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

तुम कहाँ हो

चित्र
तुम कहाँ हो कितना सत्य है, राम! नहीं जानता — तुम कहाँ हो? पर एक बात कहूँ? प्रेम... प्रेम यहाँ भी है, प्रेम वहाँ भी है। अगर तुम कण-कण में व्याप्त हो, हृदय की धड़कन, सत्य-निधि हो; तो जितना सत्य तुम्हारा है, उतना ही सत्य हमारा भी है — राम! हम हैं — तो तुम हो; तुम हो — तो हम हैं। अगर सत्य यही है, तो फिर यह दूरी क्यों? तुम भी यहीं आ जाओ, हम भी वहीं आ जाते हैं। तुम तो वहीं थे, जहाँ होना था। मैं पहुँच ही न सका वहाँ, जहाँ मिलना था। मैं उलझ गया था दर्शन में... तो इसमें भी तुम्हारी गलती है, राम? पर तुम आते न, राम! राह दिखाने को... मित्र, मिलन तो वहीं है जहाँ प्रेम की पूजा और समर्पण की भक्ति हो — क्योंकि — प्रेम यहाँ भी है, प्रेम वहाँ भी है... सत्य कहा जाए — तो भी है। ना कहा जाए — तो भी है। राम, राम! सुनो न, राम... प्रेम जहाँ है, तुम वहीं हो ना, राम! कवि : दिनेश नागर केशवरायपाटन, राजस्थान https://www.anubbutisevimarshtak.com/2026/06/kavi-dinesh-nagar-geele-baalon-ka-vah-kshan.html   गीले बालों का वह क्षण