उसने कहा था : एक उदात्त प्रेम-कथा
उसने कहा था : एक उदात्त प्रेम-कथा दिनेश नागर स्वतंत्र साहित्य-चिंतक केशवरायपाटन (राजस्थान) हिंदी कहानी-साहित्य में 'उसने कहा था' का स्थान अत्यंत विशिष्ट और गौरवपूर्ण है। चंद्रधर शर्मा 'गुलेरी' की यह कालजयी रचना आधुनिक हिंदी कहानी के विकास में मील का पत्थर मानी जाती है। 1915 ई. में सरस्वती पत्रिका में प्रकाशित इस कहानी ने हिंदी कहानी को कलात्मक परिपक्वता और नवीन स्वरूप प्रदान किया। अनेक आलोचक इसे हिंदी की पहली पूर्ण कलात्मक कहानी मानते हैं। इसकी उत्कृष्टता केवल कथानक में नहीं, बल्कि सुदृढ़ शिल्प, मनोवैज्ञानिक गहराई तथा मानवीय संवेदनाओं की मार्मिक अभिव्यक्ति में निहित है। गुलेरी ने प्रेम को भावुकता के स्तर से उठाकर त्याग, कर्तव्य और वचन-पालन के उदात्त आदर्श से जोड़ा है। यही कारण है कि एक शताब्दी से अधिक समय बीत जाने पर भी यह कहानी अपनी कलात्मक गरिमा, मानवीय संवेदना और जीवन-मूल्यों के कारण हिंदी साहित्य की श्रेष्ठतम उपलब्धियों में प्रतिष्ठित है। इस कहानी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें प्रेम और युद्ध जैसे दो परस्पर विरोधी प्रतीत होने वाले जीवन-क्षेत्रों का अत्यंत...