'नशा' : मद्य-व्यसन, स्त्री-संघर्ष और मानवीय करुणा का मर्मस्पर्शी आख्यान— मन्नू भण्डारी की कहानी का साहित्यिक विश्लेषण
'नशा' : मद्य-व्यसन, स्त्री-संघर्ष और मानवीय करुणा का मर्मस्पर्शी आख्यान — मन्नू भण्डारी की कहानी का साहित्यिक विश्लेषण दिनेश नागर स्वतंत्र साहित्य-चिंतक केशवरायपाटन, राजस्थान नई कहानी आंदोलन की अग्रणी कथाकार मन्नू भण्डारी का कथा-साहित्य आधुनिक हिंदी कहानी में मनुष्य के अंतर्जगत, संबंधों की जटिलता और सामाजिक यथार्थ के सूक्ष्म एवं विश्वसनीय चित्रण के लिए विशिष्ट माना जाता है। उन्होंने साधारण जीवन-स्थितियों में निहित असाधारण मानवीय अनुभवों को जिस संवेदनशीलता और मनोवैज्ञानिक सूझ के साथ अभिव्यक्त किया, उसने उन्हें समकालीन हिंदी कथा-साहित्य की प्रमुख रचनाकारों में प्रतिष्ठित किया। उनकी चर्चित कहानी 'नशा' मद्य-व्यसन से विघटित होते पारिवारिक जीवन, स्त्री के मौन संघर्ष, मातृत्व की गरिमा और मानवीय करुणा का ऐसा मर्मस्पर्शी आख्यान है, जिसमें सामाजिक यथार्थ और मनुष्य के अंतर्द्वंद्व का सशक्त कलात्मक समन्वय दिखाई देता है। कहानी का आरंभ अपनी कलात्मक सघनता और गहरी मनोवैज्ञानिक अर्थवत्ता के कारण विशेष रूप से उल्लेखनीय है। नशे में धुत्त शंकर जब खाली बोतल हाथ में लेकर कहता है— "कैसा...