यही सच है (कहानी–मन्नू भंडारी)
यही सच है (कहानी–मन्नू भंडारी)
प्रश्न–उत्तर एवं व्याख्या
1. 'यही सच है' कहानी की मूल संवेदना के संदर्भ में कौन-सा कथन असत्य है?
(1) यह कहानी आधुनिक स्त्री के भावनात्मक द्वंद्व और मानसिक अस्थिरता का यथार्थ चित्रण करती है।
(2) दीपा का आत्मसंघर्ष उसके चरित्र को मनोवैज्ञानिक विश्वसनीयता प्रदान करता है।
(3) दीपा की मानसिक स्थिति आधुनिक जीवन के अकेलेपन, संशय और क्षण-विशेष के सत्य को व्यक्त करती है।
(4) कहानी में 'सच' कोई स्थायी नैतिक सत्य नहीं, बल्कि परिस्थितियों और भावनाओं से निर्मित अनुभव है।
(5) कहानी के अंत में दीपा निशीथ के अतीत से मुक्त होकर संजय को जीवन का अंतिम और स्थायी सत्य स्वीकार कर लेती है।
उत्तर एवं व्याख्या : (5)
यह कथन असत्य है, क्योंकि कहानी का अंत किसी दृढ़ एवं अंतिम निर्णय पर नहीं पहुँचता। संजय के आगमन पर दीपा पुनः वर्तमान भावनाओं से प्रभावित हो जाती है और निशीथ को असत्य तथा संजय को सत्य मानने लगती है। इससे उसकी भावनात्मक परिवर्तनशीलता तथा क्षण-विशेष को ही सत्य मानने की प्रवृत्ति व्यक्त होती है।
2. 'यही सच है' कहानी के मनोवैज्ञानिक यथार्थ के संदर्भ में कौन-सा कथन गलत है?
(1) कहानी आधुनिक जीवन की भावनात्मक जटिलताओं को प्रस्तुत करती है।
(2) निशीथ अतीत की स्मृतियों का तथा संजय वर्तमान जीवन की सहजता का प्रतीक है।
(3) दीपा का चरित्र आधुनिक स्त्री की भावनात्मक असुरक्षा और मानसिक द्वंद्व को उजागर करता है।
(4) कहानी यह दर्शाती है कि मनुष्य विरोधी भावनाओं को भी एक साथ जी सकता है।
(5) दीपा का प्रेम-द्वंद्व निशीथ के प्रति प्रतिशोध और यौन-कुंठा का परिणाम है।
उत्तर एवं व्याख्या : (5)
यह कथन गलत है। दीपा का अंतर्द्वंद्व प्रतिशोध अथवा यौन-कुंठा का परिणाम नहीं है, बल्कि अतीत की स्मृतियों और वर्तमान के भावनात्मक सान्निध्य के बीच उत्पन्न मनोवैज्ञानिक संघर्ष का परिणाम है। उसके मन में निशीथ के प्रति आकर्षण, स्मृति और भावनात्मक उलझन है, प्रतिशोध नहीं।
3. 'यही सच है' कहानी के संबंध में कौन-सा तथ्य सही नहीं है?
(1) दीपा कानपुर में एक रिसर्च स्कॉलर है।
(2) कहानी में दीपा की निर्णयहीनता और अंतर्द्वंद्व का अत्यंत सूक्ष्म चित्रण हुआ है।
(3) कहानी का कथानक-परिवेश शहरी मध्यवर्गीय जीवन है।
(4) कहानी में स्त्री-मन के अंतर्द्वंद्व का अत्यंत सूक्ष्म एवं प्रभावशाली चित्रण पत्र-शैली के माध्यम से किया गया है।
(5) कहानी की भाषा सहज, प्रवाहपूर्ण और बोधगम्य है।
(6) कहानी पर अस्तित्ववादी चिंतन का प्रभाव दिखाई देता है।
उत्तर एवं व्याख्या : (4)
कहानी में स्त्री-मन में चल रहे अंतर्द्वंद्व का अत्यंत सूक्ष्म एवं प्रभावशाली चित्रण आत्मसंवादी तथा अंतर्मन-प्रधान शैली के माध्यम से किया गया है, जिसमें डायरी-सदृश आत्मकथात्मकता का आभास मिलता है; यह पत्र-शैली में लिखी गई रचना नहीं है। अतः विकल्प (4) तथ्यात्मक रूप से गलत है।
इस कहानी पर अस्तित्ववादी चिंतन का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है। नैतिकता और अनैतिकता के पार जाकर वर्तमान क्षण को ही सत्य मानने की प्रवृत्ति इसमें व्यक्त हुई है। दीपा का कथन— “मुझे लगता है, यह स्पर्श, यह सुख, यह क्षण ही सत्य है; वह सब झूठ था, मिथ्या था, भ्रम था।” — क्षण-विशेष के सत्य और अस्तित्ववादी दृष्टि को रूपायित करता है।
कहानी का मूल विषय प्रेम तथा जीवन-साथी के चयन को लेकर स्त्री-मन में उत्पन्न अंतर्द्वंद्व है। इसका कथानक शहरी मध्यवर्गीय परिवेश में विकसित होता है तथा कथानक-परिवेश मुख्यतः कानपुर से कलकत्ता और पुनः कलकत्ता से कानपुर के बीच गतिशील रहता है।
4. "नहीं आना था तो व्यर्थ ही मुझे समय क्यों दिया? फिर कोई आज ही की बात है! हमेशा अपने बताए समय से घंटे-दो घंटे देरी करके आता है, और मैं हूँ कि उसी क्षण से प्रतीक्षा करने लगती हूँ।" मन्नू भंडारी की 'यही सच है' कहानी के अनुसार, रिक्त स्थान के लिए उपयुक्त विकल्प है—
(1) निशीथ
(2) संजय
(3) मिसेज मेहता
(4) इरा
उत्तर एवं व्याख्या : (2)
यह दीपा का स्वगत कथन है। दीपा संजय से प्रेम करती है। संजय प्रायः अपने निर्धारित समय से एक-दो घंटे देर से आता था, जबकि दीपा निर्धारित समय से ही उसकी प्रतीक्षा करने लगती थी। इसलिए वह उसकी देर से आने की आदत पर खिन्नता व्यक्त करती है।
5. "वह क्यों नहीं समझता कि मेरा समय बहुत अमूल्य है...." उक्त कथन के अनुसार कौन-सा विकल्प असंगत नहीं है?
(1) दीपा का कथन, संजय से
(2) दीपा का कथन, निशीथ से
(3) दीपा का स्वगत कथन, संजय के संबंध में
(4) दीपा का स्वगत कथन, निशीथ के संबंध में
उत्तर एवं व्याख्या : (3)
दीपा को अपनी थीसिस पूरी करनी थी, इसलिए वह अपना अधिकांश समय अध्ययन में लगाना चाहती थी। किंतु संजय प्रायः अपने बताए समय से देर से आता था। वह पढ़ने का प्रयास तो करती है, किंतु ऐसी स्थिति में उसका मन अध्ययन में नहीं लग पाता। उसे बार-बार यही प्रतीत होता है—“वह आया! वह आया...”
6. "एक बार मैंने यों ही कह दिया कि मुझे रजनीगंधा के फूल बड़े पसंद हैं, तो उसने नियम ही बना लिया कि—"
(1) हर चौथे दिन ढेर-सारे फूल लाकर मेरे कमरे में लगा देता है।
(2) हर दूसरे दिन ढेर-सारे फूल लाकर मेरे कमरे में लगा देता है।
(3) हर दिन ढेर-सारे फूल लाकर मेरे कमरे में लगा देता है।
(4) हर तीसरे दिन ढेर-सारे फूल लाकर मेरे कमरे में लगा देता है।
उत्तर एवं व्याख्या : (1)
“एक बार मैंने यों ही कह दिया कि मुझे रजनीगंधा के फूल बड़े पसंद हैं, तो उसने नियम ही बना लिया कि हर चौथे दिन ढेर-सारे फूल लाकर मेरे कमरे में लगा देता है।”
संजय की यह आदत दीपा के प्रति उसके स्नेह, आत्मीयता और संवेदनशीलता को व्यक्त करती है।
7. "यही सच है" कहानी की दीपा के अनुसार, अठारह वर्ष की आयु में किया गया प्रेम होता है—
(अ) निरा बचपन, महज़ पागलपन
(ब) अटूट बना रहता है
(स) गति रहती है, गहराई नहीं
(द) आवेग रहता है, स्थायित्व नहीं
विकल्प :
(1) (अ), (ब) और (स)
(2) (अ), (ब), (स) और (द)
(3) (अ), (स) और (द)
(4) (ब), (स) और (द)
उत्तर एवं व्याख्या : (3)
दीपा के अनुसार अठारह वर्ष की आयु का प्रेम बचपने और पागलपन से युक्त होता है। उसमें आवेग तो होता है, किंतु स्थायित्व नहीं तथा गति होती है, पर गहराई नहीं।
मूल पाठ का प्रासंगिक अंश :
“फिर अठारह वर्ष की आयु में किया हुआ प्यार भी कोई प्यार होता है भला! निरा बचपन होता है, महज़ पागलपन। उसमें आवेग रहता है, पर स्थायित्व नहीं; गति रहती है, पर गहराई नहीं। जिस वेग से वह आरंभ होता है, जरा-सा झटका लगने पर उसी वेग से टूट भी जाता है...”
8. 'यही सच है' कहानी में दीपा अपनी वर्तमान प्रेम-भावुकता विषयक कौन-सा विचार व्यक्त नहीं करती?
(1) आज हमारी भावुकता यथार्थ में बदल गई है।
(2) सपनों की जगह हम वास्तविकता में जीते हैं।
(3) सारी दुनिया की भर्त्सना, तिरस्कार, परिहास और दया का विष पीना पड़ रहा है।
(4) हमारे प्रेम को परिपक्वता मिल गई है, जिसका आधार पाकर वह अधिक गहरा और स्थायी हो गया है।
(5) उपर्युक्त सभी
उत्तर एवं व्याख्या : (3)
विकल्प (3) दीपा के अतीत के प्रेमानुभव से संबंधित है, उसकी वर्तमान प्रेम-भावना से नहीं।
दीपा के वर्तमान प्रेम-भावुकता विषयक विचार -
आज उसकी भावुकता यथार्थ में बदल गई है। सपनों के स्थान पर वह वास्तविकता में जी रही है। उसे लगता है कि उसके और संजय के प्रेम को परिपक्वता मिल गई है, जिसके कारण वह अधिक गहरा और स्थायी बन गया है।
दीपा के अतीत-प्रेम का संदर्भ -
दीपा अतीत में निशीथ से प्रेम करती थी, किंतु अब उसके प्रेम, उसकी कोमल भावनाओं और भविष्य की समस्त योजनाओं का केंद्र केवल संजय है।
“...निशीथ ने मेरा अपमान किया है, ऐसा अपमान जिसकी कचोट से मैं आज भी तिलमिला जाती हूँ। सारी दुनिया की भर्त्सना, तिरस्कार, परिहास और दया का विष मुझे पीना पड़ा...”
9. 'यही सच है' कहानी के अनुसार, कौन-सा विकल्प सही नहीं है?
(1) इरा का छोटा-सा घर है, जो सुंदर ढंग से सजाया गया है।
(2) सुबह इरा मुझे कॉफी-हाउस ले जाती है। अचानक मुझे वहाँ निशीथ दिखाई देता है।
(3) पूरे तीन वर्ष बाद कॉफी-हाउस में दीपा की भेंट निशीथ से हुई थी।
(4) निशीथ ने विवाह नहीं किया था।
उत्तर एवं व्याख्या : (2)
यह कथन गलत है। इरा दीपा को शाम के समय कॉफी-हाउस ले जाती है, जहाँ उसकी मुलाकात निशीथ से होती है।
10. "उसके स्वर की आर्द्रता ने मुझे छू लिया।" दीपा का यह कथन किसके संबंध में है?
(1) निशीथ के विषय में
(2) संजय के विषय में
(3) इरा के विषय में
(4) छोटी बच्ची के विषय में
उत्तर एवं व्याख्या : (2)
यह कथन संजय के संबंध में है। उसके स्वर में निहित आत्मीयता और भावनात्मक ऊष्मा दीपा के मन को गहराई से स्पर्श करती है।
11. "ढाई साल से मैं स्वयं भ्रम में थी और तुम्हें भी भ्रम में डाले रखा था..." कथा-नायिका यह बात किससे कहती है?
(1) मेहता साहब की बच्ची से
(2) इरा से
(3) निशीथ से
(4) संजय से
उत्तर एवं व्याख्या : (4)
यह बात दीपा संजय से कहने की कल्पना करती है। उस समय उसे प्रतीत होता है कि वह अपने मन की वास्तविक स्थिति को समझ चुकी है और अब संजय के साथ किसी प्रकार का छल करना उचित नहीं होगा।
12. हावड़ा स्टेशन पर दीपा किसके स्पर्श से बुरी तरह चौंक उठती है?
(1) कुली के
(2) इरा के
(3) संजय के
(4) निशीथ के
उत्तर एवं व्याख्या : (2)
हावड़ा स्टेशन पर अचानक इरा के स्पर्श से दीपा चौंक उठती है। उस समय वह अपने विचारों, स्मृतियों और भावनात्मक उलझनों में इतनी तल्लीन थी कि अचानक हुए स्पर्श से बुरी तरह चौंक उठी।
मूल पाठ का प्रासंगिक अंश :
“तभी किसी के हाथ के स्पर्श से मैं बुरी तरह चौंक जाती हूँ। पीछे देखती हूँ तो इरा खड़ी है।”
13. "आज तो इस खुशी में पार्टी हो जाए।" 'यही सच है' कहानी में उक्त कथन किसका है?
(1) इरा का
(2) संजय का
(3) निशीथ का
(4) दीपा का
उत्तर एवं व्याख्या : (3)
यह कथन निशीथ का है। दीपा के साक्षात्कार में सफल होने पर वह प्रसन्नता व्यक्त करते हुए यह बात कहता है।
मूल पाठ का प्रासंगिक अंश :
“आज तो इस खुशी में पार्टी हो जाए।”
यह कार्य-संबंधी बातों के अतिरिक्त निशीथ का पहला आत्मीय वाक्य है, जो दीपा को विशेष रूप से प्रभावित करता है।
14. 'यही सच है' कहानी में दीपा ने निशीथ में क्या बदलाव देखा?
(1) दुबला हो गया था
(2) बाल छोटे कर लिए थे
(3) रंग गोरा हो गया था
(4) उपर्युक्त सभी
उत्तर एवं व्याख्या : (1)
दीपा ने देखा कि निशीथ पहले की अपेक्षा दुबला हो गया था। यह परिवर्तन उसकी दृष्टि में सबसे पहले आता है।
15. दीपा को विदा करने के लिए निशीथ स्टेशन पर कब पहुँचता है?
(1) गाड़ी चलने से 15 मिनट पहले
(2) गाड़ी चलने से 5 मिनट पहले
(3) गाड़ी चलने से 3 मिनट पहले
(4) गाड़ी चलने से 10 मिनट पहले
उत्तर एवं व्याख्या : (4)
निशीथ दीपा को विदा करने के लिए गाड़ी चलने से लगभग दस मिनट पहले स्टेशन पहुँचता है।
मूल पाठ का प्रासंगिक अंश :
“गाड़ी चलने में जब दस मिनट रह गए तो देखा, बड़ी व्यग्रता से डिब्बों में झाँकता-झाँकता निशीथ आ रहा था। पागल! उसे इतना तो समझना चाहिए कि उसकी प्रतीक्षा में मैं यहाँ बाहर खड़ी हूँ।”
यह दृश्य दीपा के मन में निशीथ के प्रति दबे हुए आकर्षण और भावनात्मक उथल-पुथल को पुनः जागृत कर देता है।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
आपकी टिप्पणियाँ हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं। कृपया शालीन और विषय से संबंधित विचार साझा करें।