संदेश

इग्नू लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

हिंदी साहित्य : आदिकाल की विशेषताएँ

चित्र
आदिकाल की विशेषताएँ   आदिकाल हिंदी साहित्य का प्रारंभिक विकास-चरण है। इस युग के साहित्य में विषय-वस्तु और कला—दोनों ही दृष्टियों से अनेक विशिष्ट विशेषताएँ मिलती हैं। इन्हें भावपक्ष और कलापक्ष की दृष्टि से निम्नलिखित रूप में समझा जा सकता है—   भावपक्ष विषयक विशेषताएँ: 1 . वीरगाथात्मकता आदिकालीन साहित्य की सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण विशेषता इसकी वीरगाथात्मकता है। इस युग के कवियों ने मुख्यतः राजाओं की वीरता और पराक्रम का गान किया। युद्धभूमि के रोमांचकारी दृश्य, शौर्यपूर्ण साहसिक कारनामे तथा देश-धर्म की रक्षा हेतु किए गए संघर्ष आदिकालीन काव्य के मूल विषय रहे हैं। ‘पृथ्वीराज रासो’ में पृथ्वीराज चौहान की वीरता और शौर्य का अत्यंत भावपूर्ण चित्रण हुआ है। इसी प्रकार अन्य कृतियों में भी आक्रांताओं से हुए युद्ध, रणभूमि के उत्साहपूर्ण दृश्य और वीरों की गौरवगाथाएँ अंकित हैं।  2. युद्धों का सजीव चित्रण आदिकालीन साहित्य में युद्धों का अत्यंत सजीव और प्रभावशाली चित्रण मिलता है। कवियों ने रणभूमि के दृश्य इस प्रकार प्रस्तुत किए हैं कि पाठक स्वयं को युद्धक्षेत्र में उपस्थित अनुभव करता है। ...