दीवाली
अतिथि रचनाकार
बलजीत सिंह 'बेनाम'
हाँसी, हरियाणा।
दीवाली
इनकी ज़ेबों में हरदम कंगाली है!
भिखमंगों की, यार, कहाँ दीवाली है?
जागी आँखों से मैंने सपना देखा,
हर इक चेहरे पर छाई खुशहाली है।
किस पर अब विश्वास करें इस दुनिया में?
हर डाली को काट रहा ख़ुद माली है।
जनता को बहकाता झूठे वादों से,
जिसका हर इक आँसू ही घड़ियाली है।
सबको ही दुःख-संतापों ने है घेरा,
ज़हन यहाँ पर किस इंसाँ का खाली है?
रचनाकार परिचय
बलजीत सिंह 'बेनाम' हाँसी, हरियाणा से स्वतंत्र लेखक एवं ग़ज़लकार हैं। सामाजिक विसंगतियों पर लेखन में विशेष रुचि रखते हैं।
स्थान: हाँसी, हरियाणा
संपर्क: 9812214462
रचनाकार की घोषणा
प्रस्तुत रचना रचनाकार के अनुसार पूर्णतः मौलिक एवं अप्रकाशित है। रचना की मौलिकता एवं कॉपीराइट संबंधी समस्त दायित्व रचनाकार के हैं।
संपादक: दिनेश नागर
"हिन्दी साहित्य : अनुभूति से विमर्श तक"



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