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“मेरी शारदीय!” : प्रेम और आत्मानुभूति की काव्यात्मक अभिव्यक्ति — प्रो. शमा खान के काव्य-संग्रह के संदर्भ में

“मेरी शारदीय!” : प्रेम और आत्मानुभूति की काव्यात्मक अभिव्यक्ति —  प्रो. शमा खान के काव्य-संग्रह के संदर्भ में आलोचक : दिनेश नागर                केशवरायपाटन, राजस्थान। कविता मनुष्य की उन सूक्ष्मतम अनुभूतियों की अभिव्यक्ति है, जिन्हें साधारण भाषा पूर्णतः व्यक्त नहीं कर पाती। जब संवेदनाएँ आत्मा की गहराइयों में उतरकर शब्दों का रूप ग्रहण करती हैं, तब काव्य केवल साहित्य नहीं रहता, बल्कि वह मनुष्य के अंतर्जगत का आलोक बन जाता है। प्रेम और आत्मानुभूति की इसी काव्यात्मक भावभूमि पर प्रो. शमा खान का काव्य-संग्रह “मेरी शारदीय!” अपनी विशिष्ट उपस्थिति दर्ज कराता है। उनकी कविताएँ मनुष्य के भीतर स्पंदित होने वाली उन कोमल भाव-तरंगों को स्वर देती हैं, जिनमें प्रेम केवल संबंध नहीं, बल्कि आत्मा का विस्तार बनकर उपस्थित होता है। इस संग्रह की कविताएँ प्रेम, प्रकृति और आत्मिक चेतना का एक ऐसा सौन्दर्यमय संसार रचती है, जहाँ भावुकता की अपेक्षा संवेदना की गहराई अधिक दिखाई देती है। कवयित्री की दृष्टि बाह्य जगत से अधिक अंतर्मन की सूक्ष्म अनुभूतियों पर केंद्रित है। यही कार...