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📖 कामायनी : प्रश्न–उत्तर एवं व्याख्या (जयशंकर प्रसाद कृत)

📖 कामायनी : प्रश्न–उत्तर एवं व्याख्या (जयशंकर प्रसाद कृत) चिंता और श्रद्धा सर्ग के विशेष संदर्भ में 1. ‘कामायनी’ को छायावाद का उपनिषद् किसने कहा है?           (1) शान्तिप्रिय द्विवेदी (2) मुक्तिबोध (3) निराला (4) रामचंद्र शुक्ल उत्तर : (1) शान्तिप्रिय द्विवेदी व्याख्या : शान्तिप्रिय द्विवेदी ने ‘कामायनी’ को छायावाद का उपनिषद् कहा है। मुक्तिबोध ने इसे फैंटेसी कहा। महाप्राण निराला ने इसे रहस्यवाद का प्रथम महाकाव्य माना। डॉ. नगेन्द्र ने इसे मानव चेतना के विकास का महाकाव्य कहा है तथा दिनकर ने इसे दोषरहित एवं दोषसहित रचना माना है। 2. ‘कामायनी’ के संदर्भ में असंगत कथन है— (1) कर्म का संदेश और वैराग्य मत का खण्डन (2) अभेदमूलक अद्वैतवाद का शंखनाद (3) शाश्वत जीवन और मानुष-कल्याण का काव्य (4) मानवीय संवेगों का उदात्तीकरण नहीं उत्तर : (4 ) व्याख्या : ‘ कामायनी’ में मानवीय भावनाओं और संवेगों का अत्यन्त उच्च स्तर पर उदात्तीकरण हुआ है। अतः चौथा कथन असंगत है। जयशंकर प्रसाद की ‘कामायनी’ अद्वैतवाद और मानव-कल्याण की भावना का महाकाव्य है। यह काव्य-रचना वैराग्य मत का खण्डन कर कर्...