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पथ अभी शेष है

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पथ अभी शेष है अगर आज पथ पर आघात मिला है, तो समझो यात्रा का पथ अभी शेष है। जो व्यक्ति तुम्हारा होकर भी दूर चला गया, शायद उसकी नियति कहीं और लिखी थी। यदि आकांक्षाएँ अधूरी रह गई हों, फिर भी उम्मीदों को मौन मत होने दो, हर कथा का पूर्ण होना आवश्यक नहीं, कुछ अध्यायों को स्मृतियों में अमर होने दो। जब मन बार-बार प्रश्न करे— "अभाव मेरे हिस्से में ही क्यों आया?" तब उन चेहरों को याद करना, जिन्होंने आँधियों में भी मुस्कान सजाई है। यदि हृदय में पीड़ा का अथाह सागर है, तो उसे शब्दों की धारा बनने दो, और यदि सुख की कोई सरिता फूटी है, तो उसे अपनों के आँगन तक बहने दो। जब समय प्रतिकूल प्रतीत हो, तो व्यर्थ समय से युद्ध मत करना, क्योंकि घने बादलों की भी एक सीमा होती है, और क्षितिज पर सूर्य पुनः उग आता है। रोटी, छत और अपनों का साथ हो, तो शिकायतों का भार हल्का कर दो, जीवन कभी पूर्ण न्याय का वचन नहीं देता, तुम बस संघर्षों में भी जीने की कला अर्जित कर लो। जो छिन गया, उसे प्रारब्ध का निर्णय मान लो, जो प्राप्त हुआ, उसे ईश्वर का प्रसाद जान लो, और जो अभी भविष्य के गर्भ में है, उसके स्वागत में विश्वास की ल...